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बी0 आर0 एल0 पी0 का क्रियान्वयन और रूपरेखा-

बी0 आर0 एल0 पी0 कार्यक्रम का केन्द्रिय कार्यनिति हैं, उत्साहित संग्र्ह सामर्थ्यवान महिलाओं की सामुदायिक संस्थान "स्वंय साहयता समूह" के रूप में बनाना जो सदस्य बचत, आन्तरिक ऋण और नियमित भुगतान से स्वंय संम्पोषित संस्थान बन जायेगा। जो भी समूह बनेगा वह स्वंय बचत और आपसी लेन-देन पर आधारित होगा न कि अकेले सामुदायिक नियोजित अनुदान की राशि पर। सहयोग हेतु जो राशि संघ को दी जायेगी वह अनुदानित राशि होगी। प्रारभ्भिक स्तरीय स्वंय साहयता समूह अपने अगले चरण में गॉवों में ग्रामीण संस्थान बनाकर संगठित होगा, बाद में बङे स्तर पर समूह बनाकर सदस्यता पर आधारित सामाजिक सेवा प्रदाता, स्वंतंत्र व्यवसायिक अस्तित्व और बैंकिग कार्यप्रणाली के महत्वर्पूण ग्राहक हो जायेगें। इस तरह समुदायिक संगठन प्रदान 'बैंक इन्ड' सेवा अपने विभिन्न बाजारीय संस्थान के द्वारा जैसे कि- बैंक और बीमा कम्पनी के प्रतिनिधी- प्राइवेट सेक्टर कारपोरेशन के प्रोक्यूरमेन्ट फ्रेन्चाइजीज और वितरण व्यवस्था जो विभिन्न प्रकार के सरकारी कार्यक्रम के लिए उपलब्ध कराते हैं, वे उनके सहयोगी बन जायेगें।


इस परियोजना की रूपरेखा उपरोक्त कार्यशैली (कार्यनिति) बहुश्रेणियें, स्व स्थायित्व, समुदाय आधारित संस्थान के नमूना का निर्माण जो अपने तय विकास प्रक्रिया को स्वसंचालित करेगा। इसलिए परियोजना की रूपरेखा इस तरह तैयार की गयी हैं कि पहले प्रारभ्भिक स्तर पर ग्रामीण महिलाओं के साथ स्वंय सहायता समूह को बड़े स्तर पर संतुष्टिकरण नीति के द्वारा छह चुने गये जिलों में बनाना। बिहार में अत्यधिक गरीबी होने के कारण यह परियोजना सर्वप्रथम इन समूहों को पूंजीगत करेगा स्व जमा राशि पर अनुपूरक बी0 आई0 एफ0 के नियोजित पार्ट के द्वारा देगा। यह समूह व्यवसायिक बैंको से कमपूंजीगत ऋणों के लिए भी जुड़ेगा।


अगले चरण में ये प्राथमिक स्तर के स्वंय सहायता समूह गाँव स्तर पर संगठित हो कर समुदायिक संगठन की दूसरी कतार का ग्रामीण संगठन (भी0 ओ0) बनायेगा। यह भी ओ0 (ग्रामाण संगठन) परियोजना से नियोजित पूंजी लेगा। इसके बाद स्वंय सहायता समूह और उनके सदस्यों को ऋण देगा। दूसरे चरण में समुदायिक नियोजित राशि परिसंपत्ति,खाद्द सुरक्षा क्रय और उच्च कीमतगत ऋणों को चुकाने के लिए उपयोग किया जायेगा ग्रामीण बिहार में अत्यधिक गरीबी स्तर होने के कारण इस कार्यगत पूंजी का बड़ा भाग तात्कालिक उपभोग आवशकता, विशेषकर स्वास्थ्य और खाद्द क्रय करने के लिए होगा। जो यह आश्वस्त करेगा कि परिसम्पत्ति और भविष्य में जो राशि खर्च होंगे वे साहूकार को उच्च कीमतगत ऋण चुकाने में बर्बाद नहीं होगें।


तीसरे चरण में भी0 ओ0 उच्चस्तरीय सामदायिक संस्थान का संघीय निर्माण समूह और प्रखंड स्तर पर ये शिखर सामुदायिक स्तरीय संघ 'जीवकोपार्जन' के क्रिया- कलापों को एक सरल तरीके से सुधार लाने के लिए उत्तरदायी होगें, जो निम्नस्तरीय वी0 ओ0 ज, (ग्रामीण संगठनो) लघु वित्तिय संस्थान और आर्थिक संस्थान जो कि विशिष्ट आय प्राप्ति के लिए पारिवारिक स्तर पर जमा की गई पूंजी जैसे कि पशुपालन, लघु कृषि इत्यादि, क्रियाकलापों को कायम रखते हुए आर्थिक और सामाजिक दोनों शीर्षकयुक्त को एकत्रिकृत कर उन्हें निम्नस्तरीय संस्थान में रखना आवयशक हैं।


इस बात के लिए सुनिश्चित करना होगा कि गरीबों की परिसम्पत्ति को उत्पादन उपयोग में रखना होगा और इसका परिणामगत बात यह होगी कि कठिनाए से प्राप्त संसाधन और नगद अभिजात वर्ग के द्वारा हड़प न लिया जाय जिससे कि उस सबन्ध में बढ़ती हुई आमदनी का जरिया प्रभावित न हो। सेवाप्रदाता के एक-एक समूह को इस परियोजना में साझेदारी के रूप में लगाया जायेगा, जो बाजार के साथ पूर्व सम्बन्ध जोड़कर उत्पादन और सेवा देगें, जिसका आजकल गरीबों को बहुत अधिक मिल रहा हैं।


उपरोक्त क्रमबद्धता और संयुक्त परियोजना की चरणबद्धता एक सामाजिक और आर्थिक परिवेश जो कि गरिबों के द्वारा संचालित और अपने को कायम रखने योग्य विकास को अग्रसारित करेगा।