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बिहार नवोन्मेष मंच के उद्देश्य

 

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बिहार नवोन्मेष मंच के उद्देश्य

निजी उद्यमियों, गैर-सरकारी संगठनों, समुदायों तथा सरकारी विभागों द्वारा बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में जीविका में सुधार लाने के लिए प्रोत्साहित किए जा सकने वाले नवोन्मेषों पर चर्चा करना, उनसे सीखना और उनकी पहचान करना;

इच्छुक संगठनों के साथ साझेदारी कायम करना और जीविका - बिहार ग्रामीण जीविका परियोजना के तहत हाथ में ली जा रही गतिविधियों को संपन्न करना;

सम्भावित सहायता के लिए नवोन्मेषकों का दाता अबिकरणों तथा वित्तीय सम्स्थाओं के साथ संपर्क स्थापित कराना।

नवोन्मेषों - हम इसे परिभाषित कैसे करें

नवोन्मेष नए विचारों, दृष्टिकोणों, प्रक्रियाओं, व्यवहारों, विधियों, प्रोद्यौजिकियों या तकनीकों को ठोस सामाजिक प्रभावों में रुपांतरित करने की प्रक्रिया है।

नवोन्मेषो में निम्नलिखित चीजें भी शामिल होनी चाहिए

* प्रयोज्यता (अप्लीकेबलिटी) - ग्रामीण जीविकाओं के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता। ग्रामीण जीविकाओं में सामाजिक-आर्थिक बेहतरी की व्यापक भावना निहित होनी चाहिए जिसका उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सेवाओं जैसी बुनियादी मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति में हो।

*प्रतिकृतिशीलता (रिप्लीकेबलिटी) - उसको प्रदर्शित, उन्नत और अंगीकृत किया जा सके तथा राज्य की विविधतापूर्ण ग्रामीण स्थितियों के अनुरूप अनुकूलित किया जा सके।

* सोपानीयता (स्केलेबलिटी) - भौगोलिक पहुंच और लोगों को उपलब्ध होने के लिहाज से मूल्यवान होने के कारण उसका प्रसार किया जा से।

* प्रभाव - उसे दीर्घकालिक परिणाम वाला तथा समुदायों और / अथवा व्यक्तियों को सामाजिक, आर्थिक या पर्यावरणीय लाभ प्राप्त दिलाने के लिहाज से प्रभावी होना चाहिए।

* टिकाऊपन - उसमें लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता होनी चाहिए, अर्थात बाहरी सहायता या अतिरिक्त संसाधनों की अनुपस्थिति में भी नवोन्मेष या उसके लाभ बरकरार रहने वाले हों।

* पहुंच - उसके परिणाम या प्रभाव को प्रत्यक्षतः- अप्रत्यक्षतः सामाजिक एवं आर्थिक श्रेणियों के लिहाज से लाभार्थियों/ समूहों/ समुदायों की बड़ी संख्या तक पहुंचना चाहिए।

बिहार नवोन्मेष मंच एक नजर में

राज्य में बवोन्मेषों के बारे में आधारिक सूचना (बेसलाइन इनफॉर्मेशन)के आभाव में सोसाइटी ने नवोन्मेषों के रूप में संभावित प्रस्तावों की प्राप्ति के लिए स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रसारित किए हैं। खोज की प्रक्रिया को प्रभाव बनाने के लिहाज से एक विशेषज्ञ अभिकरण नेचुरल, रिसोर्स मैनेजमेंट कंसल्टैंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एन आर एम सी) की सेवाली गई थी। इसका मकसद व्यक्तियों, संगठनों एवं समस्याओं के साथ बातचीत करके सुराग लेकर और स्नोबॉल तनीक का भी उपयोग करते हुए नवोन्मेषों के अभिलेखन में सहयोग करके तथा विज्ञापन और सुराग लेने के जरिए प्राप्त सभी संभावित प्रस्तावों का संकलन करना था। नवोन्मेष के रूप में बेहतर प्रस्तावों की पहचान करने में सहूलियत के लिए छानबीन दो चरणों में की गई थी। छानबीन का पहला चरण समाचारपत्रों के विज्ञापन में विर्णित जरूरतों पर आधारित था- जैसे संकल्पनात्मक टिप्पणी, संस्था के मामले में पंजीकरण संबंधी जरूरतें, व्यक्तियों/ संस्थाओं/ संगठनों के मामलों में प्रासंगिक फोटो, क्रियान्वित विचारों/ परियोजनाओं का अनोखापन पैमाना, प्रभाव आदि। पहले दौर की छंटाई में अप्रयाप्त सूचना पाई जाने पर छांटे गए नवोन्मेषों के बारे में अतिरिक्त सूचना पेश करने का तथा टिकाऊपन जैसे सूचकों पर आधारित थी। इसके अलावा, पूर्ववर्णित सूचकों के उप-सूचकों, सत्यापनकर्ताओं तथा सत्यापन के साधनों को भी निर्धारित किया गया तथा क्षेत्र आधारित प्रमाणीकरण किया गया। अंततः 25 प्रस्तावों को नवोन्मेष के रूप में संभावनामय पाया गया। विकास और नवोन्मेष क्षेत्र के राष्ट्रीय स्तर के विशेष्ज्ञ के सहयोज से एक रेटिंग टूल का विकास किया गया। टेटिंग टूल पर आधारित 25 नवोन्मेषों के मूल्यांकन के लिए राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ के एक पैनल को आमंत्रित किया गया।


भावी कार्यक्रम

यह दो दिनों का आयोजन होगा जिसमें उप मुख्यमंत्री बिहार नवोन्मेष मंच का शुभारंभ करेंगे और आयोजन के दौरान देश भर से आए सम्मानित अतिथियों के समक्ष माननीय मुख्यमंत्री नवोन्मेषकों की सेवाओं को मान्यता तठःआ पुरस्कार प्रदान करेंगे। यह भी आशा है कि नवोन्मेषों को आगे बढ़ाने के लिहाज से अनेक नवोन्मेषकों को संभावित संसाधन अभिकरण मिल जाएं। आयोजन के बाद इन नवोन्मेषों को समाचार पत्रों, टीवी चैनलों, और वेबसाइट के माध्यम से व्यापक समुदाय के बीच प्रचारित किया जाएगा।