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सामुदायिक संस्थाओं के क्षमता निर्माण के लिए क्रियान्वयन व्यवस्था

सामुदायिक संस्थाओं के संपूर्ण क्षमता निर्माण एंव संस्था निर्माण इकाई द्वारा किया जाएगा। एक पूर्णकालिक राज्य परियोजना प्रबंधक और एक परियोजना प्रबंधक की प्रतिनियुक्ति की जाएगी और उन्हें सामुदायिक संस्थाओं के लिए क्षमता निर्माण की घटनाओं ( इवेट्स) के योजना निर्माण, क्रियान्वयन तथा समन्वय की जवाबदेही दी जाएगी। इस मकसद के लिए प्रखंड इकाई के पास भी एक विशेष.. प्रशिक्षण अधिकारी होगा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के सारे आवयश्क इंतजामों के लिए जवाबदेह होगा। एक क्षमता निर्माण एंव प्रशिक्षण कोषांग (सेल) भी प्रस्तावित हैं। यह कोषांग बहुकार्यी ( मल्टी फंक्शनल) तरीके से बड़े पैमाने पर मौजूद कर्मियों तथा समुदायिक स्तर की प्रशिक्षण संबंधी जरूरतों की देखरेख करेगा। बाद के चरण मे इस कोषांग को ग्रामीण विकास के पेशावरों (प्रोफेशनल्स) के लिए राज्य की प्रशिक्षण संबंधी जररतों की देखरेख हेतु स्वंतत्र संगठन के रूप में विकसित किया जा सकता है प्रखंड स्तर पर उपयुक्त प्रशिक्षण अधिसंचना का आभाव एक बड़ी चुनौती होगी। इससे निपटने के लिए परियोजना मे दो दिशाओं वाली रणनीति अपनायी जाएगी जिनमें जहां भी आवश्यक हो, प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण अधिसंरचना का निर्माण करना, तथा अभी मौजूद उपयुक्त सरकारी अधिसंरचना को हासिकल करना हैं। सामुदायिक संस्थाओं के लिए बड़े पैमाने की क्षमता निर्माण योजना संचालित करने के लिहाज से बाहरी परामर्शी अभिकरण (कन्सल्टेंट एजेंसी) को शामिल करना एक मुख्य रणनीति होगी। जिन अन्य बिन्दुओं पर काम किया जाना है, वे निम्नलिखित हैं:


  • राज्य इकाई में क्षमता निर्माण एंव संस्था निर्माण विशेष.. सामुदायिक संस्थाओं को प्रशिक्षित करने के लिहाज से प्रमुख नोडल व्यक्ति होगा। सारे रणनीतिक निर्णय उसी के स्तर से किए जाएगें।
  • * राज्य और प्रखंड, दोनों स्तरों पर कामकज विशेष.. (फक्शनल स्पेशलिस्ट) और संसाधन संगठन (रिसोर्स ऑगेनाइजेशन) एक मिलकर क्षेत्रांतर्गत मूल्य निरूपण (फील्ड असेसमेंट)पर आधारित क्षमता निर्माण समाधान विकसित करेंगें।
  • प्रशिक्षण संबंधी अवयश्कताओं का मूल्य निरूपण सर्वाधिक (कहें त्रैमासिक) अधार पर किया जाएगा।
  • तकनीकी प्रशिक्षण इस विषय की निफणता वाले बाहरी प्रशिक्षक पैनल अथवा संस्थानों को दी जाएगी।
  • पीआइपी में सीखों और उसके निहितार्थों को शामिल करने के लिए वार्षिक आवयश्कता मूल्य निरूपण (ऐनुअल नीड असेसमेंट) भी कराया जाएगा।
  • एक क्षमता निर्माण एंव प्रशिक्षण कोषांग मॉड्यूल और क्षमता निर्माण की रणनीति तैयार करेगा। यह कोषांग सामुदायिक संस्थाओं तक क्षमता निर्माण कार्यक्रम का विस्तार करने में प्रखंड इकाई को सहयोग करेगा।

  • क्षमता निर्माण हेतु प्रविधि

    परियोजना में क्षमता निर्माण के लिए निम्नलिखित प्रविधि का उपयोग किया जाएगा।


  • मॉड्यूलों का विकास - क्षमता निर्माण की समस्त गतिविधियों का आयोजन समुदाय के सदस्यों की ग्रहण क्षमता के अनुरूप प्रभावी मॉड्यूल के साथ किया जाएगा। इसका निर्माण स्थानीय भाषा में किया जाएगा और उसमें श्रव्य- दृश्य उपकरणों का प्रचुर प्रयोग करने की गुजाइश होगी।
  • * करने के जरिए सीखना- प्रत्येक मॉड्यूल में पिछली बार का आयोजित कार्यक्रमों तथा समुदाय से मिलने वाले फीडबैंक से सीखने के जरिए सुधार किया जाएगा।
  • देखने के जरिए सीखना- सर्वोत्तम व्यवहारों को देखने के लिए समुदाय के सदस्यों को भेजने के लिहाज से देश और राज्य के विभिन्न स्थलों की पहचान की जाएगी और वहां उन्हें भेजने की व्यवस्था के जाएगी।
  • साधनसेवियों और अभिकरणों को सूचीबद्ध करना- परियोजना में बाहरी संसाधन अभिकरणों तथा साधनसेवियों की पहचान की जाएगी और प्रखंडो तथा राज्य के स्तर पर क्षमता निर्माण घटक के सेवा प्रदान के लिए उनकी सूची बनाई जाएगी। जिन संसाधन अभिकरणों या साधनसेवियों की सेवा ली जाएगी उनके साथ स्पष्ट समझौता पत्र (एमओयू) तैयार किया जाएगा।
  • करबद्ध समर्थन(हैंडहोल्डिंग सपोर्ट)- परियोजना में यह क्षमता निर्माण की प्रमुख रणनीति होगी। परियोजना क्रमियों तथा अन्य साधनसेवियों/ दलों/ अभिकरणों को समुदायिक स्तर पर कार्यक्रमों की प्रभाविता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कोषांग द्वारा नियमित करबद्ध समर्थन के जरिए सतत परामर्श (काउसलिंग) दिया जाएगा।
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