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जीविका संबंधी पहलकदमी

जीविका संबंधी पहलकदमी का उद्धेश्य गरीबों के लिए रोजगार सृजन के लिहाज से जीविका के मुख्य क्षेत्रों का क्षेत्रगत आधार (सेक्टोरल साइज) बढ़ाना और उत्पादकता में वृद्धि करना। इसे तकनीकी सहायता, सेवा के प्रावधान तथा बाजार सहायता तंत्र की स्थापना में निवेश करके हासिल किया जाएगा।



जीविका संबंधी गतिविधियों का चुनाव

परियोजना निर्माण की प्रक्रिया के अंग के बतौर परियोजना निर्मान की कुंजी रहे प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करने के छः चुनिंदा जिलों में जीविका के पैटर्न और संभावना के संबंध में एक अध्ययन किया गया। ये प्रश्न निम्नलिखित थेः


  • यह पहचान करना कि छहो जिलों में जिविका के प्राप्त लोग भाग ले सकते हैं और लाभ उठा सकते है;

  • यह समझना कि जीविका के चुनिंदा क्षेत्रों में अवओध, अवसर और मूल्य श्रृंखलाएं क्या-क्या है;

  • यह तय करना कि गरीबों को फायदा पहुंचाने में समर्थ बनाने के लिए इन क्षेत्रों के अंदर किए जाने वाले प्रमुख हस्तक्षेप कौन से हैं जिन्हे परियोजना द्वारा किया जाना आवश्यक है।

  • अध्ययन से पता चला कि 80 प्रतिशत से भी अधिक गरीब लोग गिनती की जीविका गतिविधियोम् पर निर्भर हैं हो कृषिगत श्रम और जीविका निर्वाहमूलक पशुपालन के इर्दगिर्द केंद्रित हैं। कृषि पर निर्भरता मुख्यतः बटाईदारी या धान की खेती में कृषिगत श्रम पर आधारित है। फलतः मार्गदर्शी परियोजनाओं से हासिल सबकों ने दर्शाया है कि काम की कमे वाले महीनों में खाद्ध सुरक्षा ग्रामीण गरीबों की वह महत्वपूर्ण आवश्यकता है जो विभिन्न प्रकार के सूदखारों के ऋअणचक्र में उनके फंसने का कारण बनती है।


    इन शीखों को ध्यान में रखते हुए परियोजना के अंतर्गत खाद्ध सुरक्षा में अप्रत्यक्ष ढ़ंग से पूरक बनने के लिए चावल सघनीकरण की एक प्रणाली तथा सहभागी प्रभेद चयन एवं प्रवर्धन कार्यक्रम के जरिए धान की उत्पादकता बढ़ाना प्रस्ताविक है जो बिहार के हर गांव में उगाई जाने वाली सर्वव्यापी खाद्ध फसल है। अध्ययन द्वारा पहचान की गई दूसरी जीविका की दूसरी सबसे आम गतिविधि गाय-भैंस पालना है। गाय-भैंस पालना और दूध उत्पादन एक आय बढ़ाने वाली गतिविधि हो सके, इसके लिए अध्ययन में सभी चयनित जिलों कें कार्यरत दुग्ध उत्पादन महासंघ (कॉम्फेड) के अध्ययन द्वारा चिहिनत सफल संस्थागत मॉडल के साथ गोलबंद स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के सदस्यों को समेकित करना है।


    अध्ययन में सभी छः जिलों में हाथ में ली जाने वाली जीविका संबंधी कृषि एवं गैर-कृषि आधारित गतिविधियों की बड़ी संख्या में पहचान की गई है। गैर-कृषि क्षेत्र की अधिकांश गतिविधियां छोटे भौगोलिक संकुलों (क्लस्टर्स) में होती हैं जिनमें विशेष जाति आधारित सामुदाइक समूह नियोजन होता है। अध्ययन द्वारा उपलब्ध कराई व्यापक सूची के आधार पर निम्नलिखित मापदंडों का उपयोग किया गया हैः 1) प्रक्षेत्र (सेक्टर) में नियोजित गरीब समुदायों की संश्या, 2) परियोजना में साझेदार बनने के लिए इच्धुक क्षेत्र के अनुभव से युक्त सेवा प्रदाता संगठनों का अशितत्व, तथा 3) राज्य के अंदर संभावित मूल्य श्रृंखला संयोजना (वैल्यू चेन लिंकेजेज)।


    आशिंक रूप से अध्ययन के आधार पर और आशिंक रूप से पायल्टों के लर्निंग पर निम्नलिखित परियोजना में हस्तेक्षेप के लिए क्षेत्रों को पहचाना गया हैः-


    क्रियाएँ /सेवाओं के जिला
    चावल की सघन सभी जिलों का चयन
    डेयरी के सभी जिलों का चयन
    भागीदारी वाइटल्स चयन और संवर्धन कार्यक्रम के सभी जिलों का चयन
    हनी मुजफ्फरपुर
    मखना मधुबनी, पूर्णिया
    मत्स्य मधुबनी, पूर्णिया
    कुक्कुट गया
    केले पूर्णिया
    धूप चिपका गया
    मधुबनी चित्रकारी मधुबनी
    कपड़ा नालंदा, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, मधुबनी