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समीक्षा

बिहार राज्य सम्पूर्ण भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 2.8% भूमि अधिगृहित करता है जिसका कुल क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर (36,356 वर्गमील) है। बिहार पूरे देश की जनसंख्या मे 8% का योगदान देता है। विभिन्न विकासत्मक सूचियो मे बिहार अपेक्षाकृत नीचले पायदान पर है। साल 2000 मे स्वतंत्र झारखण्ड राज्य निर्माण के बाद यह परिस्थिति अपेक्षाकृत निम्नतर होती गयी। बँटवारे के बाद बिहार के पास अभिभाजित बिहार के सम्पूर्ण जनसख्या का 75% और भूमि मात्र 54% रह गया। इस कारण से संसाधनो पर दबाव बढ़ गया, जिसका परिणाम यह हुआ कि गरीबी का स्तर बढ़ता गय।


बिहार की सम्पूर्ण आबादी का 42% लोग गरीबी रेखा के नीचे रहे है। राज्य बाढ़ और सूखा की समस्या से निजात पाने के लिए समाधान ढ़ूढ़ने के लिए संघर्षरत है। इस परिदृश्य मे आशा की किरण झलकती है कि इन संसाधनो के द्वारा कार्य करते हुए जनता 'जीविका' पा सकती है वहीं अपने परिवारिक आय और राज्य के आय मे भी बढोत्तरी कर सकते है। समस्या की गम्भीरता को देखकर संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार ने इस दिशा मे विश्व बैंक द्वारा सम्पोषित 'जीविकोपार्जन संवर्धन' योजना की शुरूआत की।


इस योजना की शुरूआत बी. आर. एल. पी. एस. (बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समीति) के नाम से बिहार सरकार द्वारा पंजीकृत स्वयं सेवी सस्था द्वारा संचालित किया जाएगा। बी. आर. एल. पी. एस. 'बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समीति' के द्वारा ग्रामीण जीविकोपार्जन के विकल्प को विकसित कर ग्रामीण गरीबो और महिलाओ के हितार्थ ग्रामीण् जीविकोपार्जन के विकल्प और सामाजिक तथा आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा मे कार्यन्वित करना इसका मुख्य उदेश्य है। बी. आर. एल. पी. समुदाय के साथ निम्न चार विषयो या योजनाओ के द्वारा मध्यस्थता करेगा संस्थान और क्षमता निर्माण, समाजिक विकास लघुस्तरीय वित और जीविकोपार्जन।