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1. संगठन, उसके कार्यो एवं कर्तव्यों के विवरण

बिहार सरकार के वित्त विभाग के अंतर्गत एक स्वतंत्र सोसाइटी 'बिहार ग्रामीण जीविका प्रोत्साहन सोसाइटी' की स्थापना संस्था पंजीकरण अधिनियम- 21, 1960 के तहत की गई है।


बिहार ग्रामीण जीविका प्रोत्साहन सोसाइटी ने विश्व बैंक के सहयोग से बिहार ग्रामीण जीविका परियोजना 'जीविका' की सुरूआत की है।


जीविका - बिहार ग्रामीण जीविका परियोजना - को गरीबों, बिहार सरकार और विश्व बैंक के सहयोग के जरिए ग्रामीण गरीबी से निपटने के लिहाज से रूपांकित (डिजाइन) किय गया है। परियोजना का लक्ष्य भागीदार परिवारों की स्वप्रबंधित सामुदायिक संस्थाओं का निर्माण करके और टिकाऊ जीविकाओं के जरिए आय बढ़ाकर ग्रामीण गरीबो के समाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण में वृद्धि करना है।


परियोजना के उद्देश्य

परियोजना का उद्देश्य निम्नलिखित के जरिए ग्रामीण गरीबों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण में वृद्धि करना हैः

  • ग्रामीन गरीबों की स्वप्रबंधित सामुदायिक संस्थाओं का निर्माण करना;
  • जीविकाओं के जरिए गरीबों की आय बढ़ाना; तथा
  • एकजुट आवाज के जरिए खाद्य सुरक्षा सहित सामाजिक सुरक्षा तक उनकी पहुंच बढ़ाना।

  • परियोजना की रणनीति और रूपांकन

    कार्यक्रम की केंद्रीय रणनीति स्वयं सहायता समूहों के रूप में महिलाओं पर आधारित ऐसी स्पंदनशील तथा सुविनिमेय (वाइब्रैंट एंड बैंकेबल) सामुदायिक संस्थाओं का निर्माण करना है जो सदस्यों की बचत, आंतरिक ऋण प्रदान तथा नियमित वापसी के जरिए आत्मनिर्भर संगठन बन जाएं। गठित समूह अपनी बचतों और चक्रानुसारी कोषों (रिवॉल्विंग फंड्स) पर आधारित होंगे न कि उपदान (सब्सिडी) के रूप में संस्था को दिए जाने वाली सामुदायिक निवेश कोष की अकेली खुराक पर। प्राथमिक स्तर के स्वयं सहायता समूह सदस्यता आधारित सामाजिक सेवा प्रदाता, व्यापारिक अस्तित्व तथा औपचारिक बैंक प्रणाली के मुल्यवान ग्राहक बनने के लिए ग्राम संगठन का निर्माण करके गांव और उसके बाद संकुल (क्लस्टर) के स्तर पर संघबद्ध होंगे। एसे सामुदायिक संगठन बाजार की विभिन्न संस्थाओं के लिए प्रदत्त बैंक एंड सेवाओं के लिए अनेक प्रकार के संगठनों के साथ हिस्सेदारी करेंगे- जैसे कि बैंकों और बीमा कंपनियों के लिए संवाददाता, निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए अधिप्राप्ति ( प्रोक्योरमेंट) फेंचाइजी और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के लिए सेवा प्रदान तंत्र। इसे निम्नलिखित आरेख में दर्शाया गया हैः


    परियोजनागत हस्तक्षेपों के लिए ढांचा

    सामाजिक गोलबंदी

  • सहभागी लक्ष्यकरण के जरिए समावेशी तथा न्यायपूर्ण विकास को बढ़ावा देना
  • संस्थाओं और संघों के जरिए सामाजिक और आर्थिक पूंजी का निर्माण
  • आवाज और स्तर का सृजन
  • जीविकाओं में वृद्धि

  • कौशल सृजन
  • खाद्य सुरक्षा
  • उत्पादकता वृद्धि और विस्तार सेवाएं
  • परिसंपत्तिकरण तथा आय सृजन
  • वित्तीय सेवाओं तक पहुंच
  • स्वास्थ्य और बीमा जैसी सेवाओं तक पहुंच के लिए खर्च में कमी
  • व्यावसायिक क्षेत्र के साथ संपर्क के जरिए व्यापार की स्पष्ट शर्ते
  • उभरते विकासमूलक क्षेत्रों में गरीबों की भागीदारी कराना और लाभ दिलाना टिकाऊ जीविका को समर्थन
  • गरीबों की आत्मनिर्भर संस्थाओं तथा संघों में निवेश
  • सुविधा सेवा तथा जीविका को प्रोत्साहन

    बिहार ग्रामीन जीविका प्रोत्साहन सोसाइटी की भूमिका

  • गोलाबंदी और क्षमता निर्माण
  • व्यावसायिक बैंकों के साथ संपर्क में सहयोग
  • सार्वजनिक, निजी तथा गैर-सरकारी संगठन के क्षेत्रों में हिस्सेदारी का पोषण
  • गरीबों के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण
  • ग्रामीण जीविकाओं में न्वोन्मेष को प्रोत्साहन

  • सूचना पहुँच और जबाबदेही


    हकदारी और जबाबदेही


  • सूचना तक पहुँच मे बढ़ोत्तरी
  • आवाज में वृद्धि
  • गरीबों के लिए सार्वजनिक तथा निजी सेवाओं को अधिक जवाबदेह बनाना
  • स्थानीय सरकार मे वर्धित सहभागिता तथा उसके साथ संबंधों मे मजबूती

  • परियोजना की गुंजाइश परियोजना व्यय

    परियोजना के पहले चरण में 5 वर्षों के दौरान कल्पित आच्छादन परियोजना अवधि - 5 वर्ष


    5 लाख गरीब परिवार कुल अनुमानिक परियोजना व्यय - 7 करोड़ अमेरिकी डॉलर


    4 हजार गांव विश्व बैंक का कुल वित्त्पोषण - 6.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर


    42 प्रखंड़ बिहार सरकार का अंशदान - 70 लाख अमेरिकी डॉलर


    जिले - नालंदा, गया, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, मधुबनी और पूर्णिया सामुदायिक अंशदान - 30 लाख अमेरिकी डॉलर


    परियोजना व्यय और वित्तपोषण


    परियोजना का आकार 328.50 करोड़ रू. (7.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर) है और इसका क्रियान्वयन 4 वर्षो की अवधि में किया जाएगा।


    परियोजना के कुल परिव्यय का विस्तृत विवरण इस प्रकार हैः


    घटक - प्रतिशत

  • सामुदायिक संस्था विकास
  • सामुदायिक निवेष कोष
  • विशेष तकनीकी सहायता एवं विकास निधि
  • परियोजना प्रबंधन

  • प्रखंडों का चयन

    जिलों के नाम

    कुल प्रखंड

    चयनित प्रखंड

    चयनित प्रखंड
    (पहले चरण के प्रखंड हरे रंग में हैं)

    पूर्णिया

    14

    7

    बनमनखी

    अमौर

    भगवानफर

    बैसी

    धमदाहा

    बड़हरा कोठी

    रुपौली

    आमस

    अतरी

    बाराचट्टी

    बोधगया

    डोभी

    गया

    24

    11

    गुरूआ

    खिजरसराय

    मानपूर

    शेरघाटी

    टनकुप्पा

    वजीरगंज

    नालंदा

    20

    7

    आस्थावां

    बिहार

    हरनौत

    नगर नौसा

    रहुई

    राजगिर

    सरमेरा

    खगड़िया

    7

    3

    अलौली

    चौथम

    खगड़िया

    मुजफ्फरपुर

    16

    7

    बोचहा

    ढोली (मुरौल)

    कुढ़नी

    मीनापुर

    मुसहरी

    सकरा

    सरैया

     

    मधुबनी

     

    21

     

    7

     

     

     

    खजौली

    लखनौर

    पंडौल

    राजनगर