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3. निर्णय करने की प्रक्रिया

सामाजिक ढ़ाचा और भूमिकाएं


बिहार ग्रामीण जीविका प्रोत्साहन सोसाइटी का नेतृत्व सामान्य सभा करती हैं। नीतिगत स्तर के सारे निर्णय करने तथा बिहार ग्रामीण जीविका परियोजना के प्रबंधन के मामले में सोसाइटी के अधिकारियों को सलाह देने के लिए इसके बीच से एक अधिक क्रियाशील कार्यकारी समिति गठन किया गया हैं।

बिहार सरकार नागरिक, समाज ,निजी क्षेत्र, बैंको, विद्वज्जनों तथा विकासमूलक संस्थानों के प्रतिनिधि सोसाइटी की कार्यकारी समिति का निर्माण करेंगे। बिहार ग्रामीण जीविका परियोजना के क्रियान्वयन हेतु सांगठनिक ढ़ांचे के प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं।


राज्य स्तर पर परियोजना का ढ़ांचा

राज्य स्तर पर राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (एसपीएमयूं) का गठन किया गया हैं और उसके लिए बाजार से समर्पित विकासमूलक पेशावरों के एक दल को नियुक्त किया गया हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सोसाइटी का शिर्ष अधिकारी होगा जो जीविका परियोजना का परियोजना निदेशक भी होगा। जीविका परियोजना में विभिन्न कार्यो की देखरेख तथा प्रबंषन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की साथ- साथ उसमें राज्य परियोजना प्रबंधंकों के रूप में अनेक कार्यो की विशेषता भी हो।


परियोजना और बिहार सरकार के बीच संपर्क के पोषण के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की सहायता में एक विशेष कार्यधिकारी (बिहार सरकार के योजना विभाग के एक वरिष्ठ कर्मी) भी होंगा। इस राज्य परियोजना दल के भूमिकाओं के आबंटन में एक मैट्रिक्स ढ़ांचे का अनुसरण किया जाएगा जिसमें वे परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान एक कार्य (विशेषिकृत तथा थीमेटिक) और एक जिले के उत्तरदायी होंगे।


संगठन का ढ़ांचा एक मॉडल पर आधारित हैं जिसमें परियोजना के अंन्दर संमुदायों को स्वंय सहायता समूहों, ग्राम संगठनो तथा संघों में गोलबंद करने का मुख्य कार्य अंन्दर के कर्मियों द्वारा क्रियान्वित होंगा। उभरकर सामने आने वाले कुछ खास कार्यो के लिए या जिनके लिए बिहार में पहले से ही क्षेत्रगत अनुभव मौजूद हो, परियोजना में बाहरी वाह्यप्रेषक साझेदारी (आउटसोंर्सिग पार्टनरशिप) मॉडल का अनुसरण किया जाएगा।


निम्न संस्थागत क्षमता वाले राज्य बिहार परियोजना के संस्थागत आयाम को ध्यान में रखकर राजय स्तर पर परियोजना के प्रबंधन के लिए भविष्य में तीन सांगठनिक नवोन्षित की तालाश की जाएगी। पहला , एक पशिक्षण एंव क्षमता निर्माण कोषांग का गठन किया जा रहा हैं जो बहुकार्यी तरीके से बड़ी संख्या में कर्मियों के लिए तथा समुदाय के स्तर पर प्रशिक्षण संबंधी आवकश्यकताओं की देखरेख करेगा।


बाद के चरण में इस कोषांग को ग्रामीण विकास पेशावरों के लिए राज्य में प्रशिक्षण संबंधी आवश्कताओं की देखरेख हेतु एक संवतंत्र संगठंन का र्दजा दिया जा सकता हैं।


दूसरा विभिन्न प्रकार की साझेदारीयों के जरिए जीविकाओं को प्रोंत्साहित करने की लिए एक व्यवसाय प्रोत्साहन कोषांग का गठन किया जा रहा हैं जो क्षेत्र आधारित तकनीकी सहायता प्रदान करने, गठबंधन (टाई-अप) करने, तथा खास सामग्रियों एंव उत्पादों के लिए उप-क्षेत्र आधारित दायित्वपूर्ण साझेदारियां (टर्न-की पार्टनरशिप) करने पर विचार करेगा। कोषांग परिट्योजना में नवोन्मेषों को शामिल करने का निरंतर प्रयास करेगा।


तीसरा, एक साझेदारी कोषांग का गठन किया जा रहा है जो नागरिक समाज की ऐसी संस्थाओं के साथ साझेदारी को बढ़ावा देगा और अपने स्वंय सहायता समूहों तथा संघो के गुणवत्ता उन्नयत के लिहाज से एक सेवा पैकेज के साथ ऐसे गैर सरकारी संगठनों को क्षमता निर्माण में सहायता करेगा।


सोसाइटी और परियोजना के वित्तिय कार्यो का प्रबंधन पूर्णकालेक मुख्य वित्तीय अधिकारी द्वारा किया जाएगा जो क्षेत्र आधारित स्स्मुदायिक संगठनों तक निधि का समयानुरूप प्रवाह सुनिशिचत करने के लिए परियोजना निधियों के प्रत्यायी (फिऊशियरी गवर्नेस) और सर्वोत्तम कार्य प्रक्रियाओं को अमल में लाने, दोनो के लिए उत्तरदायी होगा।


बिहार सरकार द्वारा प्रतिनियुक्ति एक पूर्णकालिक वित्तिय अधिकारी, एक अधिप्राप्ति विशेष.. और एक अनुभवी एंव प्रतिष्ठित वित्तिय प्रबंधन एंव तकनीकी सहयोग परामर्शी (एफएमटीएससी) उसकी सहयता करेंगे।


राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई नीति निर्माण और हस्तक्षेप योजना निर्माण के लिए पूर्वलक्षी तरीके से काम करेंगी और परियोजना के लिए सक्रियात्मक रणनीतियां (ऑपरेशनल स्ट्रेजीज) सूत्रबद्ध करेंगी।


जिला स्तर पर परियोजना ढ़ांचा


जिला परियोजना समन्वय इकाई (डीपीसीयू) की छः जिला इकाईयां स्थापित की जाएगी। ये इकाईयां गया, मधुबनी, नालंदा, पूर्णिया और खगड़िया जिला मुख्यालयों में कार्यशील होगी। प्रत्येक जिला इकाई का नेतृत्व करने के लिए सोसाइटी द्वारा एक जिला परियोजना समन्वय (डीपीसी) की नियुक्ति की जाएगी। जिला परियोजना समन्वयक की सहायता के लिए आवश्यकतानुरूप प्रकार्य विशेष.. (फंक्शनल स्पेशलिस्ट) रखे जाएगे। प्रखंड स्तर पर कार्यरत समस्त कर्मियों की क्षमता निर्माण संबंढःई जरूरते पूरी करने के लिए जिला परियोजना समन्वयक इकाई में एक जिला पशिक्षण समन्वयक (डीटीपी) कार्य करेंगा। जिला प्रशिक्षण समन्वयक की सहायता के लिए जिला प्रशिक्षण अधिकारी (डीटीओ) प्रतिनियुक्त किये जाएंगे


जिला परियोजना प्रबंधन इकाई परियोजना कार्य के अंन्तर्गत आने वाले प्रखंडी तथा जिलों में परियोजना की गतिविधियों के समन्वयक इकाई का ढ़ांचा विरल और लचीला होगा क्योंकि विशिष्ठ थीमों तथा विशिष्ठ जिलों में कार्यक्रम के प्रसार का पैर्टन अनेक प्रकार के कारकों पर निर्भर करेंगा। प्रस्ताव है कि आरंभ में जिला स्तर पर जिला प्रशिक्षण समन्वयक और जिला प्रशिक्षण अधिकारीयों समेत जिला समन्वयक की नियुक्ति की जाएंगी और प्रखंड तथा ग्राम स्तर पर संस्था निर्माण पर काप्फी अधिक ध्यान दिया जाएंगा। गांवों में होने वाली प्रगति तथा थीमेटिक क्षेत्रों में उभरने वाली जीविकाओं के अनुरूप जिला दल में अन्य कार्य विशेष.. को शामिल किया जाएंगा।


प्रखंड स्तर पर परियोजना ढ़ांचा


सोसाइटी प्रखंड स्तर पर प्रखंड परियोजना क्रियान्वयन इकाई (बीपीआइयू) की स्थापना करेंगी। यह परियोजना की मुख्य इकाई है। इस इकाई की गुणवत्ता इस बात को निर्धारित करेंगी कि क्षेत्र में परियोजना कितने प्रभावी ढ़ंग से चलती है। परियोजना अवधि में कुल मिलाकर ऐसी 42 इकाईओं का निर्माण किया जाएगा (परियोजना के सभी 6 जिलों में चयनित प्रखंडों की कुल संख्या)। ऐसा इस इकाई का कार्यकारी प्रधान होगा/होगी। क्षेत्रीय समन्वयक , सामुदायिक समन्वयक और न्यूतम आवयश्क संख्या में वित्तिय तथा प्रशासनिक कर्मी उसकी सहायता करेंगे। मुख्य रूप से सोसाइटे की यह इकाई पूरी परियोजना अवधि में बनाई जाने वाले प्रस्तावित सामुदायिक संगठनों के लिए आदर्श संक्रियात्मक इकाई (मिरर फक्शनल) के रूप में कार्य करेंगीं। तथापि, प्रखंड परियोजना क्रियान्वयन इकाई का मुख्य कार्य प्रखंडस्तरीय संघो के निर्माण और कामकाज में सहयोग करना होगा। प्रखंड इकाई समुदाय के प्रतिनिधियों की क्रमिक विकास प्रक्रिया में सहयोग करेंगी जो समय के साथ प्रखंड परियोजना क्रियान्वयन इकाई को पूरी तरह अपने हाथ में ले लेंगे।


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